श्रद्धा और भक्तिभाव के बीच चौरचन का पर्व सादगीपूर्ण रूप से संपन्न

(गौरव आनंद की रिपोर्ट)

☆ परबत्ता(जनप्रसंग): मिथिलांचल में भाद्रपद्र की चतुर्थी तिथि यानी गणेश चतुर्थी के दिन मनाया जाने वाला पर्व चौरचन(चौठचन) शनिवार को हर्षोउल्लास के साथ मनाया गया। कोरोना काल के बीच इस वर्ष पर्व को बाजारों में ज्यादा रौनक देखने को नही मिली। वहीं कई महिलाओं ने इस वर्ष चौरचन को सादगी पुर्ण तरीके से मनाया।


मालूम हो की मिथिला में गणेश चतुर्थी के दिन ही चंद्र देव का पूजन किया जाता है। इस दिन व्रत रखा जाता है और शाम को चांद को अर्घ्य देकर ही व्रत पूरा होता है। एक तरफ जहां छठ में सूर्य की उपासना हो या चौरचन में चांद की पूजा का विधान है। माना जाता है कि इस पूजा के करने से भगवान चंद्रदेव प्रसन्न होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

इसके पीछे की कहानी है कि चंद्र देव ने अपनी सुंदरता के अभिमान में भगवान गणेश का मजाक उड़ा दिया, जिसके बाद भगवान गणेश ने उन्हें श्राप दे दिया। इसके बाद भगवान गणेश को मनाने के लिए चंद्र देव नें भाद्रपद की चतुर्थी को गणेश जी की पूजा की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर गणेश भगवान ने उन्हें आशीर्वाद दिया कि जो भी इस खास मंत्र के साथ गणेश चतुर्थी को चंद्र देव का दर्शन करेगा, उसका जीवन निष्कलंक रहेगा। तभी से यह व्रत मनाया जा रहा है। इस दिन मिट्टी के बर्तन में दही जमाया जाता है। कहते हैं इसका स्वाद बहुत ही खास होता है। इसके अलावा इस दिन बांस के बर्तन में खास खीर बनाई जाती है। इसके साथ ही कई तरह के पकवान और फल भी चढाये जाते हैं।

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