वक्ताओं ने कहा हिंदी हमारी राष्ट्रीय स्मिता,एकता और अखंडता का प्रतीक है
नसीम रब्बानी(वैशाली) की रिपोर्ट
बिहार(जनप्रसंग): वैशाली हिंदी साहित्य सम्मेलन के तत्वाधान में राष्ट्रीय हिंदी दिवस के अवसर पर दिघी कला हाजीपुर स्थित देवचंद महाविद्यालय के प्रांगण में मुख्य अतिथि प्राचार्य देवचंद महाविद्यालय डॉ तारकेश्वर पंडित के हाथों जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए साहित्यकारों को सम्मानित किया गया । कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वैशाली हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष और मानवाधिकार पत्रकारिता के संवाहक डॉ शशि भूषण कुमार ने कहा कि भाषा मानवीय जीवन की एक महत्वपूर्ण इकाई होती है,जिसके माध्यम से मनुष्य अपने भावों और विचारों को अभिव्यक्त करता है। राजभाषा के रूप में भाषा और भी महत्वपूर्ण हो जाती है,क्योंकि यह सरकार और जनता के बीच की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। सरकार की नीतियों,उपलब्धियों आदि को जनता तक पहुंचाने का एकमात्र माध्यम भाषा है।
हिंदी भाषा ने अपने विकास यात्रा में अनेको -उतार चढ़ाव को देखा है, लेकिन धीरे-धीरे ही सही यह भाषा परिष्कृत होती हुई जन-जन की भाषा बन रही है। हिंदी भाषा को टीवी सीरियलों व चलचित्रों ने घर-घर की भाषा बना दिया है। हमें हिंदी बोलने में शर्म का अनुभव नहीं करना चाहिए,बल्कि गर्व का अनुभव होना चाहिए साथ ही डॉ कुमार ने यह भी कहा कि हिंदी हमारी राष्ट्रीय स्मिता,एकता और अखंडता का प्रतीक है। मुख्य अतिथि डॉ तारकेश्वर पंडित ने कहा कि हमारे देश में प्रति वर्ष 14 सितम्बर को हिंदी दिवस और 14 से 21 सितम्बर तक हिंदी सप्ताह के रूप में मनाया जाता है। 14 सितंबर को राष्ट्रीय हिंदी दिवस मनाया जाता है क्योंकि 14 सितंबर,1949 को संविधान सभा ने हिंदी को राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था। 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है क्योंकि 10 जनवरी,1975 को प्रथम हिंदी सम्मेलन नागपुर में आयोजित किया गया था।
हमें अंग्रेजी का ज्ञान होने चाहिए क्योंकि यह वैश्विक भाषा हैं, लेकिन हम हिंदी के साथ अन्याय भी नहीं करे। हमें हिंदी के साथ -साथ अन्य भाषाओं का भी सम्मान करने चाहिए। सम्मेलन के उपाध्यक्ष मेदनी कुमार मेनन ने अपने संबोधन में कहा कि हिंदी के सतत विकास के लिए वैशाली हिंदी साहित्य सम्मेलन निरंतर प्रयत्नशील है। यहाँ उपस्थित साहित्यकारों का सम्मान उसी की कड़ी है। समारोह में उपस्थित मानव अधिकार कार्यकर्ता अमित कुमार ‘विश्वास’ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 343(1) के तहत हिंदी को राजभाषा का दर्जा प्राप्त है। उन्होंने कहा कि हिंदी का अपमान अपनी माँ का अपमान है। हमें अन्य भारतीय भाषाओं के साथ-साथ अंग्रेजी सीखने पर भी बल देना चाहिए। हमें आर्थिक तरक्की के लिए भाषा संबंधी संकीर्ण मानसिकता से ऊपर उठकर अपने ज्ञान के दायरे को बढ़ाना होगा। वर्तमान समय ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था का है। आज हिंदी भी रोजगार की भाषा बन चुकी है। इसलिए हमें संकीर्णता को त्यागकर एक सकारात्मक विकासवादी दृष्टिकोण के साथ अपनी मातृभाषा के साथ-साथ अन्य भाषाओं को भी सीखने पर बल देना चाहिए जिससे रोजगार के नवीन अवसरों का सृजन भी हो सके।
समारोह में साहित्यकारों को विभिन्न सम्मानों से सम्मानित किया गया। डॉ प्रवीण सागर को राज नारायण चौधरी स्मृति सम्मान, श्री शम्भू शरण मिश्रा को कपिल छवि स्मृति सम्मान,डॉ हरिशंकर सुमन को मनमोहन स्मृति सम्मान ,लव कुमार शर्मा को डॉ बिजली सिंह स्मृति सम्मान, धर्मेंद्र सिंह,योगेंद्र प्रसाद गुप्ता ,संगीता राय और सुश्री अलका श्री, डॉ केकी. कृष्ण को विंदेश्वरी प्रसाद सिंह स्मृति सम्मान, अश्वनी आलोक को सूर्य कुमार शास्त्री स्मृति सम्मान,विजय कुमार विनीत को चंदेश्वर राम चंदे सम्मान, को साहित्य सेवी सम्मान से सम्मानित किया गया। समारोह में अशोक कुमार, प्रिंस कुमार गुप्ता, नीरज कुमार सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित हुए। अंत में अमित कुमार ‘विश्वास’ ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
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