विभिन्न राजनीतिक दल सहित सामाजिक संगठनों ने भारत बंद का किया समर्थन

(गीता कुमार की रिपोर्ट)

जनप्रसंग डेस्क: किसान संगठनों द्वारा किये गये भारत बंद के समर्थन में परबत्ता में भी विपक्षी पार्टियों समेत सामाजिक संगठनों के लोग भी सड़कों पर उतर कर भारत बंद का समर्थन करते दिखे। बंद समर्थकों ने पूरे बाजार,अंचल कार्यालय सहित प्रखंड कार्यालय पूरी तरह से बंद कर ब्लॉक गेट पर बैठ कर जाम का समर्थन कर रहे थे। बंद समर्थकों को संबोधित करते हुए सीपीआई के अंचल सचिव कैलास पासवान ने कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा अलोकतांत्रिक तरीके से थोपे गये तीनों कृषि कानून कॉरपोरेट हितैषी व किसान विरोधी आत्मनिर्भरता की बात करने वाली मोदी सरकार किसानों को गुलामी की ओर धकेल रही है,मुल्क को गुलाम बना रही है.
वही सामाजिक न्याय आंदोलन के सौरव कुमार ने कहा कि लंबे समय से किसान लागत के डेढ़ गुना कीमत पर अनाज की सरकारी खरीद की गारंटी की मांग कर रहे हैं.लेकिन नए कानूनों से एपीएमसी जैसी कृषि संस्थाएं ही बर्बाद होगी. न्यूनतम समर्थन मूल्य की अवधारणा ही खत्म हो जा रही है.कृषि गहरे संकट में है.कृषि व किसानों को इस संकट से उबारने के लिए कृषि बजट और किसानों की सब्सिडी में बढ़ोतरी,किसानों को कर्ज मुक्त करने,लाभकारी मूल्य देने सहित पिछले दो दशकों से धूल फांक रही स्वामीनाथन कमीशन की सिफारिशों को लागू करने की जरूरत है.किसान इन सवालों पर आवाज बुलंद करते रहे हैं.लेकिन इस संकट को देशी-विदेशी कंपनियों व कॉरपोरेटों के लिए अवसर बनाया जा रहा है.

वहीं राजद के प्रखंड अध्यक्ष अखिलेश दास ने कहा कि कोरोना महामारी के आपदा को नरेन्द्र मोदी सरकार ने मेहनतकशों-बहुजनों पर हमले के विशेष अवसर में बदल दिया.कृषि संबंधी तीन कानूनों को थोपने के साथ मजदूरों को भी बंधुआ हालात में धकेल देने और पूंजीपतियों को मनमानी की छूट देने के लिए श्रम कानूनों को बदल दिया है.निजीकरण की गति भी बढ़ा दी गई है.इसी बीच मंत्रिमंडल ने शिक्षा के क्षेत्र में भी निजीकरण को आगे बढ़ाने नई शिक्षा नीति-2020 के ड्राफ्ट को पास किया.यह शिक्षा नीति सामाजिक न्याय विरोधी-बहुजन विरोधी है.कुल मिलाकर सब कुछ देशी-विदेशी पूंजीपतियों के हवाले करने और सामाजिक न्याय को भी ठिकाने लगाने की मुहिम आगे बढ़ रही है.ब्राह्मणवादी जातिवादी,सांप्रादायिक व पितृसत्तावादी हिंसा और लोकतांत्रिक आवाज का दमन भी बढ़ रहा है.

ब्राह्मणवाद व कॉरपोरेट के जुगलबंदी व हमले के बीच किसानों की साहसिक लड़ाई का हम सभी संगठनों की ओर से क्रांतिकारी अभिनंदन करते हैं.किसान शहीदों को सलाम करते हैं. भारत बंद में सक्रिय तौर पर कांग्रेस के प्रखंड अध्यक्ष प्रभाकर यादव ,सी.पी.एम. के हरेराम चौधरी ,सीपीआई के वकील शर्मा, सुब्रत शर्मा, राजद के इरशाद आलम, आत्मा के प्रखंड अध्यक्ष अंजनी यादव सहित नीतीश कुमार, लालू यादव, गौरव कुमार, विपिन चंद्र मिश्र, राजनीतिक सिंह,रौशन घौला,अभिषेक सहित सैकड़ो लोग शामिल थे।

मड़ैया बाजार को भी किया जाम

किसान संगठनों द्वारा किये गये भारत बंद का मड़ैया में भी व्यापक असर देखने को मिला जहां नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के आह्वान पर आंदोलन किया गया। “किसान बिल वापस लो” नहीं तो आगे भी आंदोलन जारी रहेगा जैसे नारों से चौक गूंजता रहा। भारत बंद में राष्ट्रीय जनता दल के पूर्व परबत्ता प्रखंड अध्यक्ष मुबारक राईन, जिप उपाध्यक्ष मो.ग्यासउद्दीन, युवा राजद के जिला सचिव अजमत अली, युवा राजद के जिला महासचिव रंजीत राणा, पिपरा लतीफ पंचायत के उपसरपंच अब्दुल राजिक, देवरी पंचायत के वार्ड सदस्य शहाबुद्दीन, कांग्रेस परबत्ता प्रखंड उपाध्यक्ष मोहम्मद बाबर,यदुवंशी सेना के जिला अध्यक्ष युवा श्रवण यादव सहित कई लोग शामिल थे।

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