मदर्स डे: आखिर क्यूं मनाया जाता है मदर्स डे, जानिए कब और कैसे हुई इसकी शुरुआत

जनप्रसंग(शानू आनंद): माँ के त्याग, सहनशीलता और प्रेम के प्रति आभार प्रकट करने के लिए दुनियाभर में माँ के लिए दिन मनाया जाता है, जिसे मदर्स डे कहा जाता है।
मदर्स डे हर साल मई के दूसरे रविवार को मनाया जाता है। इस साल यह 09 मई को है। हर देश में मदर्स डे को अलग-अलग तरीके से सेलिब्रेट किया जाता है। कहा जाता है कि मां भगवान का दूसरा रूप होती है और इसलिए मां के लिए कोई एक दिन नहीं हो सकता है। लेकिन फिर भी एक दिन देश की हर मां को समर्पित किया गया है ताकि अपने हर काम को भूलकर अपनी मां को स्पेशल महसूस कराया जा सके।

मदर्स डे का महत्व

हम सभी जानते हैं की हमारे जीवन में माँ का कितना महत्व है। परंतु मदर्स डे एक ऐसा दिन होता है जो माँ के साथ- साथ बच्चों के लिये भी अहम होता है। यह दिन माँ के प्रति अपनी भावनाओं को प्रकट करने का एक मौका देती है। दुनियाभर के अधिकतर देशों में लोग इस दिन माँ के प्रति अपने समपर्ण को व्यक्त करता है।

कैसे हुई मदर्स डे की शुरुआत

साल 1908 में पहली बार इस दिन की शुरुआत अमेरिका से हुई थी। अमेरिका की ऐक्टिविस्ट एना जार्विस ने माँ के सम्मान के लिए एक दिन समर्पित किया था जिसके बाद से लोग मदर्स डे मनाने लगे। इसके अलावा इसाई समुदाय के लोग इस दिन को प्रभु यीशु मसीह की माता वर्जिन मैरी का दिन भी मानते है। इसी दिन यूरोप और ब्रिटेन में मदरिंग संडे भी मनाया जाता है।

भारत में कैसे हुई मदर्स डे की शुरुआत

अमेरिकी प्रेसिडेंट वुड्रो विल्सन ने 9 मई 1914 को एक कानून पारित किया जिसके मुताबिक मई के दुसरे रविवार को मदर्स डे के रूप में घोषित किया गया था। इसी के बाद भारत सहित दुनिया के कई देशों में मई के दुसरे रविवार को लोग मदर्स डे के रूप में मनाने लगे।

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