👉 खगड़िया के सांसद और विधायक को खूब सुनाया खरी-खोटी
खगड़िया(जनप्रसंग): खगड़िया जिले की स्वास्थ व्यवस्था की कुव्यवस्था एवं जर्जर हालात पर जिले के सामाजिक कार्यकर्ता सौरव कुमार ने अपने फेसबुक वाल से खगड़िया के सांसद,विधायक एवं जनप्रतिनिधियों को खूब खरी खोटी सुनाया उन्होनें अपने फेसबुक पर खगड़िया की लाचार स्वास्थ व्यवस्था एवं इसके इसके कुव्यवस्थित होने के कारनों को दर्शाते हूए यहां की व्यवस्था को जल्द सुदृढ़ करने की मांग की. सौरव कुमार ने अपने फेसबुक वाल पर मंत्री,सांसद एवं विधायकों द्वारा दी गयी राशि का भी जिक्र करते हूए लिखा है की-
“ना दवा-ना इलाज,लाचार है खगड़िया का स्वास्थ विभाग“
इस तस्वीर को लगा कर आगे वो लिखते हैं की-
पिछले वर्ष कोरोना के समय खगड़िया लोकसभा और परबत्ता विधानसभा के हमारे जनप्रतिनिधि- सांसद और विधायक महोदय द्वारा 50-50 लाख का पैकेज देने की जो घोषणा हुई थी उसकी सच्चाई का पता आपको तब चलेगा जब आप अपने किसी परिजन को लेकर अस्तपाल जाएँगे। जब कोरोना का प्रथम वेब चल रहा था तब पुल निर्माण कम्पनी ने अपने सामाजिक दायित्वों के तहत 2 वेंटिलेटर- एक परबत्ता सीएचसी को और दूसरा सदर अस्पताल खगड़िया को डोनेट किया था। जिसका शुभारंभ तत्कालीन जदयू विधायक रामानंद सिंह के पुत्र डॉ संजीव कुमार ने किया था जो वर्तमान में परबत्ता के विधायक हैं। चुनाव के वक्त उनके समर्थक और वे खुद भी जगह-जगह प्रचारित करते नहीं थकते थे कि हमने परबत्ता में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ कर दिया है अब यहाँ के लोगों को वेंटिलेटर जैसी आधुनिक स्वास्थ्य सुविधा अब परबत्ता में ही मिल जाएगा। आमलोग भी यह समझ रहे थे कि हमारे जनप्रतिनिधियों के द्वारा जो राशि जिले में स्वास्थ्य सुविधा को बेहतर बनाने के लिए दिया गया है उससे जिलेवासी को जल्द ही लाभ मिलने लगेगा। लेकिन मौजूदा कोविड संकट काल में हकीकत ठीक इसके उलटा दिखाई दे रहा है।
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आपको यकीन नहीं होगा किन्तु सच्चाई यह है कि पिछले साल जिस वेंटिलेटर का शुभारंभ किया गया था उससे अभी तक एक भी लोग लाभान्वित नहीं हो पाए हैं। परबत्ता में एंबुलेंस सुविधा की भी कमी दूर नहीं हो पाई है। करीब 3 लाख की आबादी पर मात्र दो एम्बुलेंस है, जिसमें की एक तो कर्मचारी लोग अपने साथ टीकाकरण में लेकर चले जाते हैं, बचता है सिर्फ एक एम्बुलेंस लोगों की सुविधा के लिए! अब जब बड़ी संख्या में लोग कोरोना से संक्रमित हो रहे हैं तो एक बार फिर हमारे प्रतिनिधि 50 लाख-25 लाख देकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ले रहे हैं। उनके समर्थक नेताओं द्वारा दिए गए धन राशि की चिट्ठी को सोशल मीडिया पर डालकर उनका यशगान करने में जुटे हुए हैं।
आपनी आपबीती को लिखते हूए बताते हैं की-
पिछले 21 अप्रैल को जब मैं अपने एक दोस्त को सदर अस्पताल खगड़िया एडमिट कराने गया, तब पता चला की वहाँ केवल ऑक्सीजन ही है और कुछ नहीं, जरूरी दवाइयों आपको बाहर से ही लाना होता है।कुव्यवस्था का आलम यह है कि शरीर के अंदर के ऑक्सीजन सैचुरेशन मापने वाला ऑक्सिमिटर तक वहाँ नहीं है। जो लोग COVID-19 का टेस्ट कराने आ रहे हैं उन्हें घंटों तेज धूप में खड़ा रहना पड़ रहा है, उनके लिए एक टेंट तक की व्यवस्था नहीं है। कोविड का एंटीजेन किट वाला टेस्ट सदर अस्पताल में होता है तो RTPCR वाला टेस्ट खगड़िया जंक्शन पर दोनों के बीच करीब 3 किलोमीटर का फासला है। वहाँ तक जाने के लिए गाड़ी वाले भी खूब पैसा ऐठ रहे हैं और आपदा में लूट मचा रहे हैं। वहाँ उपस्थित कर्मी से बात करने पर उन्होंने कहा कि आप सिविल सर्जन से बात करिये! सिविल सर्जन को फोन करिये तो फोन लगता ही नहीं है।
तब सवाल उठता है कि आखिर यह करोड़ों रुपये की जो राशि हमारे प्रतिनिधि के द्वारा दिया गया था, जो वास्तव में जनता का ही पैसा है, उसका आखिर हो क्या रहा है? किसके पेट में जा रहा है यह पैसा?
अभी जरूरत था कि हमारे जनप्रतिनिधि इन सरकारी हॉस्पिटल का दौरा कर सच्चाई से अवगत होते; अधिकारी और वहाँ उपस्थित चिकित्सा कर्मी को निर्देश देते तो शायद लोगों को कुछ सहूलियत मिलती। लेकिन हमारे जनप्रतिनिधि हाथ खड़े कर चुके हैं। पिछले साल वाला खेल इस साल भी खेला जा रहा है। अभी हाल के दिनों में चहल-पहल रहने वाले गांव, जहां हर रोज मुखिया, पंचायत समिति व जिला परिषद प्रत्याशियों की गाड़ियां दिखती मिलती थी, तारीख आगे बढ़ने की वजह से उनके भी चक्के बंद पड़े हैं। किसी को भी किसी की मदद करने का मन नहीं है, सब बस भाग रहे हैं, जनता को उनके हाल पर भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है। यहां के जनप्रतिनिधि चाहे वो जीता हुआ हो या हारा हुआ हो, सब के सब बस अपने-अपने घरों के कोने में दुबके हुए हैं। किसी की मौत उनके नींद को भंग नहीं करती। इन धूर्त और कायरों को कुछ पैसे ने बहादुर बनने का गलत एहसास करा रखा है।
सच्चाई यही है कि इनमें से किसी को आमलोगों की कोई फिक्र नहीं है, हॉस्पिटल के आगे गिड़गिड़ाता शख्स भी आने वाले चुनाव में उनका ही जयजयकार करेगा! यह बात हमारे प्रतिनिधियों को अच्छी तरह से पता है, इसलिए उन्हें इन हाँफते और मरते हुए लोगों की कोई फिक्र नहीं है।








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